तुम्हारी फ़िक्र मैं
तुम्हारी फ़िक्र मैं ज़माना है
तजुर्बा वो मुझे कमाना है
तुम हिकारत से देखते जिसको
वो मुफलिसी मेरा ठीकाना है
मुश्किलें रोज ही मिलती है गले
दुःख से खूब दोस्ताना है
वक्त और जिंदगी मैं फर्क यही
एक तवारीख , एक फ़साना है
"पयोधि " उठके गए है वो कुछ यू
पलट क अंजुमन मैं आना है

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