"एक लड़की "
वो कमसिन , मासूम , सुर्ख गालो वाली एक लड़की |
आफ़ताब के साथ घर से निकलती है इठलाते हुए |
जिस सिम्त शुआये जाती है साथ मैं वो भी चल पड़ती है |
हर रोज़ की तरह वो मदहोश , आवारा सबा के साथ खेलती है |
पहाड़ो की ऊचईयो पे वो सबसे जुदा दरख्तों के साथ रहती है |
वो एक पगली सी इठलाती लड़की हर रोज़ उसी के नाम के गाने गाती है |
एक दिन तूफ़ान जोरो शोरो से आया था , महबूब को उसने अपने पुकारा था |
महबूब की आई ना थी आवाज़ तब , तूफान भी थम गया था जब |
न जाने कौन सी दुश्मनी तूफान ने उसके साथ निभाई थी |
हर रोज़ उसी तूफान के इंतज़ार मैं दिन पूरा काट देती है|
प्रतिशोध की आग मैं खुद को ताप ती रहती है |
वो तूफान भी सहमा सहमा उस लड़की से अब रहता है |
और हर वक़्त इसी सवाल को सोच के घबराता अब रहता है |
काश वो उस दिन कुछ देर और थम जाता |
लड़की का मिलन उसके महबूब से हो जाता |
सय्यद मुहम्मद अलतमश
8/12/12
न जाने कौन सी दुश्मनी तूफान ने उसके साथ निभाई थी |
हर रोज़ उसी तूफान के इंतज़ार मैं दिन पूरा काट देती है|
प्रतिशोध की आग मैं खुद को ताप ती रहती है |
वो तूफान भी सहमा सहमा उस लड़की से अब रहता है |
और हर वक़्त इसी सवाल को सोच के घबराता अब रहता है |
काश वो उस दिन कुछ देर और थम जाता |
लड़की का मिलन उसके महबूब से हो जाता |
सय्यद मुहम्मद अलतमश
8/12/12

nice chote bhaijaan....!!
ReplyDeletethnx
ReplyDelete