Saturday, 26 January 2013

किस देश की है ये नारी...















लगी थी जो आग अब वो ठंडी हो गई,
उडी थी जो खाक अब वो गंगा मैं मैली हो गई ,

मैं जनता था कुछ दिन का शोर गुल है 
मनुहार आवाजो का देश मैं गुल है ,

सो गए है लोकतंत्र के मंच को बेच कर 
जो न्यायाधीश थे गुल हो गये ज़मीर बेच कर ,

हुआ है शर्मिंदा भारत, भारत मैं
लोग कह रहे है नहीं लुटती है इज्ज़त भारत मैं ,

मैं जनता था शर्मसार इस बार भी तुम्ही होगी 
समाज का सबसे बड़ा आँखों का काटा भी तुम्ही होगी ,

नहीं आते है कृष्ण बचाने द्रौपदी को हर बार 
आते है रावन समझाने ज़माने को हर बार ,

होती है शादी जलती  है नारी 
मरती है नारी पिसती है नारी ,

दिखाती नहीं पीड़ा फिर भी सजती है नारी  
किस देश की है ये नारी भारत देश की है ये नारी |

लेखक : अलतमश जलाल


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