रस्ते तेरे कूचे के बड़ी बेचेनी से देखते है मुझको वो रस्ते जो मैं बरसो पहले तेरे साथ छोड़ आया था
ना चाहते हुए आज गुज़रा तेरा रंग उनपे दिखा
सब बदल गए नुक्कड़ पे एक दरख़्त भी अब नहीं रहा
हवाए ज़रूर तेरी खुशबू के राग आज भी गा रही थी
लेकिन सन्नाटो ने कहा अकेली तू आज भी बहुत है
तेरी याद न आये इसलिए जाम से दोस्ती करली है
और ऐसा भी नहीं है "जलाल" तझे भूलने की कसम खाली हमने |
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